मेरी पहली पंक्ति 🙏❤️
❤️मेरी पहली पंक्ति❤️ क्या कहूंमें अपने बारे में में खुद से बाहर नही निकल पाया हूँ वह बात भी क्या अजीव सी थी सब कहते थे तुम में एक संसार बसा है तुम खुद को जानो पहचानो क्या कहूँ में अपने बारे में में संसार में गुम सा गया हूँ ये जो शौक थे जो कुछ विरासत में आये मुझमे ये मेरे तीर थे तलबार थे अब चुभते बहुत है जो ये तीर थे तलबार थे जो विरासत में आये मुझमे कागजो पर लिखे हुए जमाना हुआ ऐसा भी नही की स्याही ना हो सारा मन का खेल था अब जैसे मन का भी मन न हो कोई सुने कोई पढे या कोई पहचाने मुझको उससे मेरी बात ये कहना अब तो बहुत देर हो गयी जाने, अनजाने अब तू न जाने मुझको बात तुम्हारी मानी हमने हम अपने संसार में तो हैं चुभते हैं तीर तलबार बहुत मगर फिर भी हम अपने मयान में तो हैं पहली पंक्ति तुम मत पढ़ना में झूठा साबित हो जाऊंगा पढलो समझो तो फिर मत कहना में खुद से बाहर निकला था जैसे दूध हो केसर का सोने सा ...