मेरे सपने Aakashdeep sinsinwar
दर से दर तक गए होंगे कितने बेखबर रहे होंगे हिसाबों की दुनिया में बेहिसाब रहे होंगे अपने चंद मरे होंगे किस तरह जिये होंगे बीघा भर खेत भी हल से जुते होंगे गांव से शहर तक पैदल ही गए होंगे पैर जले होंगे छाले भी पड़े होंगे दर से दर तक गए होंगे कांटे भी लगे होंगे किसी का पुत्र किसी का पिता भाई पति न जाने कितनी लाचारियां रही होंगी उलझनों में कुछ कश भी लिए होंगे नफरतों में पल दो पल जिये होंगे शहर से लौटे होंगे थक गए होंगे जाम आंसुओ के आंखों ने पिये होंगे सपने मेरे आंखों ने जिये होंगे उठ खड़े होंगे दौड़ पड़े होंगे जो नही हैं साथ बो साथ खड़े होंगे मेरेसपने कितने खुश नसीब रहे होंगे कुए के अंदर कुए रहे होंगे सपने मेरे कितने गहरे रहे होंगे वूंद वन नदियों में गिरे होंगे नदियों संग समंदर तलक गए होंगे बड़े बेचैन रहे होंगे उम्र भर साथ रहे होंगे उठ खड़े होंगे दोवारा जुट पड़े होंगे दोवारा हादसों में मेरे कब ये हादसे होंगे सपने मेरे कब सच साथ से होंगे कब इक ...