ब्रज के राजा सूरजमल Aakashdeep sinsinwar

 

भाइयो मेरी अव तक कि लिखी जिसे में सबसे अच्छा मानता हूं आपको शेयर कर रहा हूं कुछ गलतियां हो तो माफ करे सच्चाई है ❤️❤️🙏🙏🙏🙏🙏

आकाशदीप सिनसिनवार 

आजऊ गांव तहशील कुम्हेर जिला भरतपुर

जय महाराजा सूरजमल 

8290336052


ब्रज के राजा सूरजमल 🙏🙏🙏🙏🙏😊😊


जाट वीर सूरज के हम वंशज उत्तर में फैली धाक हमारी

 राजा सूरजमल जाट हमारे जैसे स्वयं श्री कृष्ण ब्रजराज पधारे 


 राजपाट खातिर हिन्दू से हिन्दू लड़वाया था 

अब्दाली  तव न्योतो से जयचंदो ने बुलवाया था 


 धर्म की हानि खातिर  अब्दाली ने हिन्दू हीन किया 

 मंदिर तोड़े बच्चे मारे साधु संत औरत सव का कुदीन किया

अकेला जाट खड़ा धर्म की खातिर मथुरा में 

छाती पर खाये घाव  कयी न मिले मराठे रजवाड़े साथ कहीं

तव जाके कहलाया था अंतिम हिंदू सम्राट सूरजमल सिनसिनवार कहीं

 एक अकेले जाटों ने कट कट कर बलिदान दिया 

  हिन्दू धर्म की खातिर अड़ियल जाटों ने मृत्यु को स्वीकार्य किया 

  श्री कृष्ण के वंशज पर न कोई भी वार हुआ 

  छलिया के प्रकोप से अब्दाली,  खुद हार गया 

  सेना मरे रोज दो सौ की ऐसा दैवीय प्रकोप हुआ 

  ब्रज के राजा सूरजमल चहुँओर उजियारे थे


जब वीरमराठा शक्ति ने उत्तरको प्रस्थान किया 

भगवा की खातिर  सव ओर रुझान किया 

जब अकेले ब्रजराज   ने धर्म भाऊ का साथ दिया 


पर मति मर गयी सव काम खराव हुए

 सदाशिव खुद में अहंकार लिए 

 अपमानित शब्दो की बौछार लिए 

 ए जाट तुझे हम देखेंगे पहले पानीपत लेंगे 

 

सूरज को तारा समझ वैठे

ज्ञान को अज्ञान में दे वैठे 


ब्रजराज के सुझावों को अपनी सी चालाकी समझ वैठे 


जब सूरज ने मना करि दिल्ली की छत न टूटेगी 

हम कृष्ण के वंशज हैं ऐसे मानवता रूठेगी 

बदले में 5 लाख की मदद ब्रजराज से होवेगी 

मानवता की छत न टूटेगी 


नारी और बच्चों की खातिर जाट के द्वार खुले 

शेर शेर रण में जायगौ और सव सुरक्षित लोहागढ़ में जायगौ 

वहां महारानी किशोरी ममत्व का भार लिये 

सबको रखेंगी भगवा सम्मान लिए 

डीग कुम्हेर ग्वालियर अभेद लोहागढ़ के

 मराठों के लिए सव द्वार खुले


भाऊ की वुद्धि फिर गयी  हर वात जाट की काट दई

जो मराठा सेना ब्रजराज को पहचान गयी वू भाऊ ने डांटदई 

ए जाट तुझे हम देखेंगे पहले पानीपत ले लेंगे 


छत तोड़ी अहंकार में सोने चांदी करोड़ो की चाह में 

न पांच के भी तीन मिले 

सदाशिव (भाऊ) अहंकार में लीन मिले

न मानी सूरज की न पहचानी जात जाट की 


ब्रजराज की समझों को अपनी सी चालाकी समझ वैठे 


जाट खड़ा धर्म की खातिर अपमानित स्वरों के घूंट पिये 

जैसे पितामह  कृष्ण को महाभारत में खो वैठे हों


ब्रजराज अपमानों का छाती पे बोझ लिए ब्रज (लोहागढ़)को प्रस्थान किये 

न मानी वात उजियारे की न वनी बात  मतवाले की 


जिसके खुद के धीर न हो और साथ रणधीर न हो 

कैसे जीते कोई लड़ाई संग सूरजमल शमशीर न हो 


   हिन्दू का हिन्दू की खातिर औरत वच्चों के रक्षार्थ लिए 

 महाराजा सूरजमल ने मन से  ग्वालियर भरतपुर डीग कुम्हेर दिए 

 

   मतवाले के कोरेपन ने सेना के अहंकार में 

   ब्रजराज के भोलेपन पर कइयोंबार आघात किया 

   इतिहास में वही घाव हुआ न हानि न लाभ हुआ 

   अब पछताये रण में हर सैनिक जाट कू याद करे 

   जाट पछताय भाऊ कू सूरज ने कितने सुझाव दिये

   न मानी वात उजियारे की न वनी वात मतवाले की 

   उल्टी पड़ी चाल  शिव की परिणाम में हार मिली

   अंत देख अपनो का शिव को सूरज की कमी चहुंओर खली

   अदम्य साहसी भाऊ ने भगवा को अपनी भेंट चढा डाली

     

   

   आन पड़े हजारों नर नारी बच्चे सैनिक मराठे सव

    जाट के दर पर हाहाकार मचे 

   अपनी बची हुई जान लिए स्त्रियों की आन लिए

     भगवा सम्मान लिए ब्रजराज से शरण की आस लिए 

     सब ब्रजद्वार खड़े 

मन में  कौंधे ए जाट तुझे हम देखेंगे पहले पानीपत ले लेंगे

मराठा मन में पश्चाताप लिए स्त्री वच्चे  इज्जत का भार लिए

मन में चले बात सबके एक 

सूरज की क्यो न बात मानी 

अकेलौ ब्रजराज ही कर देतौ पानीपत कौ पानी पानी

 

  ब्रज के राजा सूरजमल  रानी किशोरी संग आए

  हिन्दू धर्म की लाज लिए मराठो के स्वाभिमान लिए 

   सब अपमानों को क्षणभर में भुला आए

    सब अपने घर में बुला लिये

  लोहागढ़ के ममत्व का भार लिये

  जाट वैठे हाथों में हार लिये

  मराठाओ के बिन मांगे ग्वालियर भरतपुर डीग कुम्हेर दिये

  ब्रजराज ने हिंदुत्व को शरण दिये 

  जाट वीर सूरज के हम वंशज उत्तर में फैली धाक हमारी

      जिनके राजा कहते थे ओ जाट तुझे देखेंगे पानीपत बाद 

       वो सूरजमल जाट खड्यो रक्षक बन के मराठो का आज

       ऐसे पहुंची दक्षिण तक धाक हमारी 

       हर जन्म में गर्म मिलेगी खून और राख हमारी 

  ब्रजराज आकाश सा हृदय लिए सोने चांदी के सिक्के सेंत दिए 

  हजारों मराठे हाथी घोड़ो सोने सूरज सेना संग 

  दक्षिण कू भेज दिए न लडवे कौएहसान ब्रजधर्म से निभा दिए

    इतिहासों से मिटा दिए पर इतिहास हमने  बना दिए  

       बू खून कहां बदलैगौ जग में 

        बू जाट कहांबदलैगौ मन में 

        गर्मी आवेगी तन में 

        आग लगे जैसे सन में

        एकलौ ही जीत दिला देगौ

         तू बात तौ मान अफगाने अकेलौ हरा देगौ 

         पानीपत कौ कर देगौ पानीपानी 

         जाट नरेश महाराजा सूरजमल स्वाभिमानी  

      ई जाट भरतपुर बारौ था 

      जो डरयो न तीर  तलवारों से तोपो से न भालो से

       रहा दो कदम आगे जाट मुगलो दुर्रानी  की सब चालो से

      

    जाट वीर सूरज के हम वंशज उत्तर में फैली धाक हमारी

 राजा सूरजमल जाट हमारे जैसे स्वयं श्री कृष्ण ब्रजराज पधारे

आकाशदीप सिनसिनवार 5 july 2021

टिप्पणियाँ

Sachin Faujdar ने कहा…
Bhut Sundar Line Likhi H Bde Bhai


Bhut Hi Sundar Bde Bhai
Unknown ने कहा…
जय हो दादा की 🙏

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