मेरे सपने Aakashdeep sinsinwar

 


दर से दर तक गए होंगे कितने बेखबर रहे होंगे

हिसाबों की दुनिया में बेहिसाब रहे होंगे 

अपने चंद मरे होंगे  किस तरह जिये होंगे 

बीघा भर खेत भी हल से जुते होंगे 

गांव से शहर तक पैदल ही गए होंगे 

पैर जले होंगे छाले भी पड़े होंगे 

दर से दर तक गए होंगे कांटे भी लगे होंगे 

किसी का पुत्र किसी का पिता 

भाई पति न जाने कितनी लाचारियां रही होंगी 

उलझनों में कुछ कश भी लिए होंगे 

नफरतों में पल दो पल जिये होंगे 

शहर से लौटे होंगे थक गए होंगे 

जाम आंसुओ के आंखों ने पिये होंगे 

सपने मेरे आंखों ने जिये होंगे 

उठ खड़े होंगे दौड़ पड़े होंगे 

जो नही हैं साथ बो साथ खड़े होंगे 

मेरेसपने कितने खुश नसीब रहे होंगे

कुए के अंदर कुए रहे होंगे 

सपने मेरे कितने गहरे रहे होंगे

वूंद वन नदियों में गिरे होंगे 

नदियों संग समंदर तलक गए होंगे 

बड़े बेचैन रहे होंगे 

उम्र भर साथ रहे होंगे

उठ खड़े होंगे दोवारा

जुट पड़े होंगे दोवारा 

हादसों में मेरे कब ये  हादसे होंगे 

सपने मेरे कब सच साथ से होंगे 

कब इक   दर  पर होंगे सभी 

कब  सबको खबर होंगे सपने सभी 


1 अगस्त 2021 AAKASHDEEP सिनसिनवार (Ajau)


टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
सराहनीय कार्य मेरे भाई 🙏🏻
बेनामी ने कहा…
अदभुत प्रशंसनीय


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